आज मैं आपको एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ - 'पुरुषार्थ क्यों आवश्यक है ?'
इस प्रश्न का जवाब रीडर्स से मांगने के बजाये मैं स्वयं दे रहा हूँ। पुरुषार्थ का मतलब है मेहनत। इस मतलब से देखें तो प्रश्न हो जाता है - मेहनत क्यों आवश्यक है? मेहनत यानि पुरुषार्थ, एक आवश्यक चीज़ है क्योंकि इससे हम अपने वर्त्तमान और भविष्य को संवार सकते हैं।
'पुरुषार्थ - प्रसून' ये नाम मेरे नानाजी ने बहुत ही सोच समझ कर, अपने भवन का लिखा जो उन्होंने सन १९६८ में बनवाया था। इसका अर्थ है - मेहनत का फूल। यथार्थ में कोई भी प्रतिफल जो हमे मिलता है वो किसी की मेहनत का प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से फल ही है।
इस प्रश्न का जवाब रीडर्स से मांगने के बजाये मैं स्वयं दे रहा हूँ। पुरुषार्थ का मतलब है मेहनत। इस मतलब से देखें तो प्रश्न हो जाता है - मेहनत क्यों आवश्यक है? मेहनत यानि पुरुषार्थ, एक आवश्यक चीज़ है क्योंकि इससे हम अपने वर्त्तमान और भविष्य को संवार सकते हैं।
'पुरुषार्थ - प्रसून' ये नाम मेरे नानाजी ने बहुत ही सोच समझ कर, अपने भवन का लिखा जो उन्होंने सन १९६८ में बनवाया था। इसका अर्थ है - मेहनत का फूल। यथार्थ में कोई भी प्रतिफल जो हमे मिलता है वो किसी की मेहनत का प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से फल ही है।
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